﻿वह खड़खड़ानेवाली!
क्या है वह खड़खड़ानेवाली?
और तुम्हें क्या मालूम कि क्या है वह खड़खड़ानेवाली?
"जिस दिन लोग बिखरे हुए पतंगों के सदृश हो जाएँगें,"
और पहाड़ के धुन के हुए रंग-बिरंग के ऊन जैसे हो जाएँगे
"फिर जिस किसी के वज़न भारी होंगे,"
वह मनभाते जीवन में रहेगा
"और रहा वह व्यक्ति जिसके वज़न हलके होंगे,"
उसकी माँ होगी गहरा खड्ड
और तुम्हें क्या मालूम कि वह क्या है?
आग है दहकती हुई
